Fake job website: नोएडा में साइबर क्राइम थाना पुलिस ने एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया है जो लंबे समय से बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा देकर ठगी कर रहा था। पुलिस को सूचना मिली थी कि आरोपी सेक्टर-23 गेट के पास मौजूद है। इसके बाद टीम मौके पर पहुंची और उसे पकड़ लिया गया। गिरफ्तारी के समय वह कार में बैठा हुआ था और भागने की कोशिश नहीं कर सका। कैसे करते थे ठगी आरोपी और उसका गिरोह फर्जी जॉब वेबसाइट बनाकर लोगों को फंसाते थे। इन वेबसाइट पर वर्क फ्रॉम होम और बड़ी कंपनियों में नौकरी के नाम पर आकर्षक ऑफर दिखाए जाते थे। जैसे ही कोई युवक संपर्क करता, उससे रजिस्ट्रेशन और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर पैसे मांगे जाते। शुरुआत में भरोसा दिलाया जाता और धीरे-धीरे कई बार में पैसे वसूले जाते थे। पैसे का खेल ठगी से मिली रकम सीधे असली बैंक खातों में नहीं रखी जाती थी। इसके लिए म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल होता था। पैसे आते ही तुरंत निकाल लिए जाते और आगे दूसरे खातों में भेज दिए जाते थे। इस पूरे काम में बैंक अकाउंट, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड बार-बार बदले जाते थे ताकि पुलिस तक मामला पहुंचने से पहले सबूत खत्म किए जा सकें। गिरोह का नेटवर्क जांच में सामने आया कि यह पूरा गिरोह झारखंड से ऑपरेट किया जा रहा था। वहीं बने कॉल सेंटर के जरिए देशभर के बेरोजगार युवाओं को फोन किया जाता था। आरोपी खुद भी इस नेटवर्क का हिस्सा था और अपने साथी के साथ मिलकर पैसे आगे पहुंचाने और अकाउंट मैनेज करने का काम करता था। धीरे-धीरे यह नेटवर्क कई राज्यों तक फैल चुका था। सबूत और रिकॉर्ड गिरफ्तार आरोपी की पहचान प्रशांत श्रीवास्तव के रूप में हुई है, जो मूल रूप से बिहार का रहने वाला है। तलाशी के दौरान उसके मोबाइल से कई अहम सबूत मिले हैं, जिनमें फर्जी नौकरी के ऑफर लेटर, चैट रिकॉर्ड, कॉल रिकॉर्डिंग और लोगों का डेटा शामिल है। पुलिस का कहना है कि उसके खिलाफ पहले से भी कई शिकायतें दर्ज हैं और वह लंबे समय से इस तरह की गतिविधियों में शामिल था। आगे की कार्रवाई पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया है। अब पूरे गिरोह की तलाश की जा रही है और बाकी लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही इस नेटवर्क के और सदस्य भी गिरफ्त में आ सकते हैं। ये भी पढ़े : जिम्स कर्मचारी अपने रुख पर अड़े, साथियों की रिहाई तक काम पर लौटने से इनकार